क्यों महापंचायत करने को मजबूर किसान ? आओ किसानों के साथ

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(News officer. In)
धान की पराली (अवशेष) को लेकर सरकार के दो टूक फरमान से नाराज क्षेत्र के किसान गुरुवार को स्थानीय जीवन नगर मंडी में महापंचायत करेंगे। इस महापंचायत में घग्घर बेल्ट के 50 से अधिक गांवों के किसान शामिल होने जा रहे हैं। यह माना जा रहा है कि इसमें पराली जलाने का फैसला लिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो सरकार व प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा होना तय है। बता दें कि गत वर्ष इन्हीं दिनों में इसी जगह किसानों ने इकट्ठे होकर पराली जलाने का फैसला लिया था।उधर इलाके के सभी गांवों में अधिक से अधिक संख्या में किसानों को इकट्ठा करने के लिए लाउडस्पीकरों के माध्यम से मुनियादी की जा रही है। वहीं कई गांवों में किसान पराली जलाने को लेकर सामूहिक सौगंध भी खा चुके हैं।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि सरकार पराली को लेकर उनके साथ जबरदस्ती कर रही है। सरकार के पास इस संबंध में कोई ठोस नीति नहीं है। वे गत वर्ष से ही यह मांग कर रहे हैं की सरकार पराली निपटान के लिए प्रत्येक किसान को कम से कम 6000 रुपए प्रति एकड़ खर्चा दे या फिर सरकार खेतों से पराली को उठा कर ले जाए। उन लोगों को तो केवल खेत खाली चाहिए ताकि वह समय पर गेहूं की बिजाई कर सकें। उनका कहना है कि सरकार स्टरा मैनेजमेंट के नाम पर लाखों रुपए की फिजूलखर्ची कर रही है। इस योजना के तहत यंत्रों पर दिया जा रहा अनुदान उनके किसी काम का नहीं। लाखों रुपए के यंत्र 2 साल में ही कबाड़ बन जाएंगे, इसमें केवल किसानों का नुकसान ही है।
इलाके में धान की पराली किसानों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनती जा रही है। अधिकतर क्षेत्र में 1401 बासमती पैदा किया जा रहा है। एक तो यह पकने में अधिक समय लेती है, ऊपर से इसकी पराली मात्रा में बेहद अधिक व ठोस होती है। ऐसे में किसान के पास फिलहाल इसका कोई हल नहीं है।

पंचायत एसोसिएशन कर चुकी सहयोग
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सबसे बड़ी समस्या बन चुकी पराली के लिए पिछले साल पंचायत एसोसिएशन ने भी किसानों का साथ दिया था। इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही होता हुआ नजर आ रहा है। श्याम सिंह गिल सरपंच दमदमा ने बताया कि सभी सरपंच बैठक में अवश्य पहुंचेंगे। वे लोग किसान पहले हैं सरपंच बाद में। बता दें कि उधर गत दिनों प्रशासन द्वारा सरपंचों के साथ की की बैठक के बाद अपना पक्ष रखते हुए, एसोसिएशन सदस्यों ने कहा था कि वे लोग किसी किसान पर दबाव नहीं बनाएंगे। किसी किसान की शिकायत भी नहीं करेंगे। प्रशासन को अपने स्तर पर ही यह काम करना होगा।

ग्रीन ट्रिब्यूनल की शर्तें लागू करे सरकार
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार सरकार किसानों पर दबाव बना रही है मगर उसके द्वारा किसानों के हित में कही गई बातों को दरकिनार किया जा रहा है। सरकार किसान को पराली निपटान के लिए प्रति एकड़ ₹6000 का सहयोग करें। घग्गर बेल्ट में अगर गेहूं की बिजाई देरी से होती है तो किसानों को प्रति एकड़ 3 से 4 क्विंटल तक नुकसान होता है। सरकार को जनहित के बारे में सोच कर फैसला लेना चाहिए तभी इस समस्या का समाधान निकल सकता है।
स्वर्ण सिंह विर्क, वरिष्ठ किसान नेता

100 प्रतिशत होगी कार्रवाई
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इस बार पराली जलाने वाले किसानों पर 100 प्रतिशत कार्रवाई होगी। ऐसा करने वाले किसानों के न केवल चालान काटे जाएंगे बल्कि प्रदूषण अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज किया जाएगा। उधर अगर कोई सरकारी कर्मचारी सरपंच, नंबरदार या अन्य इस अधिनियम की उलंगना करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी उसे बिना किसी नोटिस के पद से भी हटाया जा सकता है। किसानों से उनकी अपील है कि किसान पराली को जलाने की बजाएं उसे खेतों में ही मिलाएं, इसी में उनका फायदा है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि इस बार क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं बेहद कम होंगी।
अमित गुलिया, एसडीएम ऐलनाबाद

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