जस्टिस रणजीत सिंह के खिलाफ 15 अक्टूबर से चंडीगढ़ में धरने पर बैठेंगे बराड़

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चंडीगढ़ । श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले में जस्टिस रणजीत सिंह के लाई डिटेक्ट करवाने को लेकर धरने पर बैठे एडवोकेट जरनैल सिंह बराड़ 15 अक्टूबर से चंडीगढ़ में धरना शुरू करेंगे। भीम साईं भी उनका साथ देंगे।बता दें कि वह गत 31 दिनों से इसी मांग को लेकर ऐलनाबाद तहसील कार्यालय के सामने धरने पर हैं। उधर उनका कहना है कि बार-बार जांच कमेटियां गठित करने की बजाय शीघ्र न्याय के लिए उनकी मांग अनुसार लाई डिटेक्ट करवाकर सत्यता जांचनी चाहिए।
1984 दिल्ली सिख कत्लेआम का न्याय कुछ इसी तरह से बार-बार जांच एजेंसियां बनाकर 35 सालों से लटकाकर रख दिया गया है।
इस बारे में जानकारी देते हुए बराड़ ने बताया कि अब उन्होंने 15 अक्टूबर से चंडीगढ़ में धरना स्थांतरित करने का फैसला लिया है। स्थानीय तहसील कंपलेक्स के सामने धरने पर बैठे हुए बुधवार को उन्हें पूरे 31 दिन हो गए हैं। ऐसे में उनके द्वारा लिखे गए पत्रों आदि का अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2015 में पड़ोसी राज्य पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की गई थी। इस मामले में अभी तक कोई न्याय नहीं मिला है। इससे पूरा समाज दु:खी है। इसका अंदाजा अभी 7 अक्टूबर के दिन पंजाब के बरगाढ़ी मार्च में बड़ी संख्या में पहुंचे आम लोगों से लगाया जा सकता है । जस्टिस रणजीत सिंह ने इस मामले में पंजाब विधानसभा जो रिपोर्ट सौंपी है वो भी विवादों के घेरे में है। उसमें उन्होंने इसके लिए बादल परिवार को भी दोषी ठहराया था । जिसके बाद श्ररोमणि अकाली दल ने रणजीत सिंह पर दबाव में कार्य करने का आरोप लगाकर सीबीआई जांच की मांग करना शुरू कर दिया। उन्होंने रणजीत सिंह को एक पत्र लिखकर अपील की है कि वह अपना लाई डिटेक्ट टेस्ट करवाऐं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके द्वारा पेश की गई रिपोर्ट इमानदारी पूर्वक व बिना किसी भय,लालच व दबाव में की गई है। अगर वह ऐसा करते हैं तो यह धर्म व न्याय के लिए बड़ी मान की बात होगी। उधर वहीं अगर इस मामले की जांच किसी और एजेंसी को सौंपी जाती है तो न्यायिक प्रक्रिया बेहद लंबी हो जाएगी। न्याय में देरी उन लोगों के लिए बेहद कष्टदायक होगी जो पहले ही काफी समय से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। 1984 दिल्ली सिख कत्लेआम का न्याय कुछ इसी तरह से बार बार जांच एजेंसियां बनाकर 35 सालों से लटकाकर रख दिया गया है।

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