‘मानहानि’ धारा-499 क्या व क्यों

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आप अक्सर यह सुनते होंगें की किसी ने फलां व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया है।आखिर क्या होती है मानहानि ? यह जानने के लिए एड़वोकेट वीरेन्द्र सिंह भादू से बातचीत की गई और उनसे यह जाना गया कि मानहानि क्या होती है।

मानहानि क्या है ?
मानहानि असल में वो प्रभाव है जो किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की आधारहीन आलोचना करके उसके बारे में गलत व झूठी धारणा बिना किसी पुख्ता आधार के समाज में पेश करके उसकी छवि को बिगाड़ा जाता है।
“किसी व्यक्ति, व्यापार, उत्पाद, समूह, सरकार, धर्म या राष्ट्र के प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाने वाला असत्य कथन मानहानि (Defamation) कहलाता है। अधिकांश न्यायप्रणालियों में मानहानि के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही के प्रावधान हैं ताकि लोग किसी व्यक्ति आदि की विभिन्न प्रकार की मानहानियाँ तथा आधारहीन आलोचना अच्छी तरह सोच विचार कर ही करें। “

मानहानि के प्रकार – मानहानि दो प्रकार से हो सकती है एक तो मौखिक रूप में जिसमे किसी व्यक्ति या संस्था आदि को विशेष निशाना बनाकर उसकी झूठी व आधारहीन आलोचना की जाती है या फिर प्रकाशन के रूप में भी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ उसकी छवि खराब करने के उद्देश्य से अगर कुछ प्रकाशित किया जाता है और उसको पढ़कर या मौखिक रूप से की गयी टिप्पणी को सुनकर लोगो के मनो में किसी व्यक्ति या संस्था आदि विशेष के लिए घृणा का भाव उत्पन्न होता हो तो यह मानहानि की श्रेणी में आता है |

मानहानि की दशा में सजा के प्रावधान – इसके लिए भारतीय दण्ड सहिंता के अनुसार धारा 499 और धारा 500 के अनुसार मानहानि के अपराध में दोषी पाये जाने पर दोषी को दो साल तक की सजा हो सकती है।इसके अलावा जिस व्यक्ति की मानहानि होती है वह व्यक्ति मानहानि करने वाले व्यक्ति से अपनी मानहानि की एवज में घनराशि भी वसूल कर सकता है।

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