10 oct मंगलवार सिरसा में किसानों की हूंकार, पराली जलाने की तिथि होगी तय

News
किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश का किसान एकजूट होकर सामने आया है । इसकी शुरूआत जीवन नगर अनाज मंडी से हो चुकी है । सरकार के इस फरमान पर किसानों का पक्ष् स्पष्ट  है कि उन्हें ठोस उपाय दो, अन्यथा वह हर हाल में पराली जलाएंगे । आंदोलन को गति देने के लिए किसान संघर्ष समीति बनाई गई है। 
Newsofficer.in | Kissan News 
मंगलवार को सिरसा चौटाला हाऊस के सामने स्थित देवीलाल पार्क में किसानों की जिलास्तरीय महासभा होगी । जिसमें मुख्य रूप से धान की पराली जलाने को लेकर तिथि तय की जाएगी । इसके साथ ही आंदोलन को तेज करने के लिए किसान संघर्ष कमेटी का विस्तार भी किया जाएगा । इसके बाद किसान अपनी मांगों को लेकर जिला उपायुक्त को मांग पत्र भी सौपेंगे । बता दें कि इससे पहले गत दिन जीवन नगर में 80 गांवों के किसान हर हाल में पराली जलाने की घोषणा कर चुके हैं।
       किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष बूटा सिंह करीवाला, सदस्य अंग्रेज सिंह,  सुखदेव सिंह विर्क, बली सिंह, सरदूल सिंह, मोहन सिंह, जरनैल सिंह, नरवैर सिंह, हरभेज सिंह ने बताया कि मंगलवार की जिलास्तरीय बैठक में आंदोलन को अंतिम रूप दिया जाएगा । धान की पराली को लेकर किसानों पर थोपे जा रहे फैसले के विरोध में पराली को जलाने के लिए तिथि तय की जाएगी। उनके बार-बार इसके लिए ठोस योजना बनाने के आग्रह के बावजूद सरकार इसे अनदेखा कर रही है। ऐसे में मजबूरन उन्हें पराली जलाने का फैसला लेना पड़ रहा है। अब एक ही दिन पूरे जिले में पराली को जलाया जाएगा । इसके साथ ही विभिन्न मांगों को लेकर जिला उपायुक्त को मांग पत्र भी सौंपा जाएगा ।
गांव -गाव प्रचार कर रही समिति
———————————–
किसानों को एकजूट करने के लिए किसान संघर्ष समिति गत कई दिनों से गांव-गांव जाकर प्रचार कर रही है। सरकार की किसान विरोधी नीतियों के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। समिति सदस्यों ने बताया कि प्रत्येक गांव में समिति सदस्य बनाए गए हैं । वे अपने स्तर पर किसानों को हर गतिविधि से जागरूक करवा रहे हैं । आंदोलन को सफल बनाने के लिए समिति का विस्तार भी किया जाएगा ।  मंगलवार की जिलास्तरीय सभा में बड़ी संख्या में किसान पहुंचेंगे।
जीवन नगर में कर चुके पराली जलाने की घोषणा
————————————————————
गत 4 अक्तूबर को पराली की समस्या को लेकर जीवन नगर मंडी में 80 गांवों के किसान एकत्रित हुए थे । उस समय धान की पराली के संबंध में सरकार के फैसले पर चर्चा की गई थी। जिसमें यह फैसला किया गया था कि सरकार चाहे जेल भेजे चाहे जुर्माना लगाए वे लोग हर हाल में पराली को जलाएंगे । इसके सिवाए उनके सामने कोई रास्ता नहीं है। उसी समय 10 अक्तूबर को जिलास्तरीय सभा की घोषणा की गई थी। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को मांग पत्र भी सौंपा गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *