धान की पराली न जलाने के सरकारी फरमान के विरोध में उतरी पंचायत एसोसिएशन

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– उचित निपटान का प्रबंध न किया तो करेंगे फैसले का विरोध
Newsofficer.in | Kisan News
 धान की पराली जलाने को प्रतिबंधित कर सख्ती से लागू करवाने की फिराक में लगी प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। सरपंच एसोसिएशन ने शुक्रवार को विशेष बैठक कर इस फरमान का विरोध करने के लिए कमर कस ली है। बता दें कि सरकार अभी से इस फरमान को लेकर सरपंचों पर दबाव बना रही है कि वह अपने-अपने क्षेत्र में इसे सख्ती से लागू करवाऐं। ऐसा न करने पर उनपर कार्रवाई करने की भी बात कही जा रही है।
        शुक्रवार को एसोसिएशन बैठक में दमदमा सरपंच शाम सिंह गिल, धर्मपुरा सरपंच गुरदेव सिंह, हारनी सरपंच प्रतिनिधि दिलराज सिंह, मिर्जापुर सरपंच गुरमंगत सिंह, जीवन नगर सरपंच सुखबीर सिंह, हरिपुरा सरपंच दर्शन सिंह, संतनगर सरपंच गुरदीप सिंह आदि एसोसिएशन प्रधान करीवाला सरपंच बूटा सिंह की अध्यक्षता में एकत्रित हुए। उन्होंने सरकार द्वारा उनपर बनाए जा रहे दबाव को सरकार का तुगलकी फरमान बताया । साथ ही उन्होंने इस फरमान का विरोध करने के लिए रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि  सरकार व प्रशासन जोर-शोर से से कह रहा है कि फसलों के अवशेष जलाने से प्रदूषण होता है। हमें बताय जाए कि जब दशहरे से लेकर दीपावली तक करोड़ो पटाखें चलाए जाते हैं। रावण आदि के पुत्तले फुकें जाते हैं। अनगिनत फैक्टरियों से निकल रहा धुआं क्या प्रदूषण नहीं है। उपरोक्त सभी पर सरकार प्रतिबंध क्यों नही लगा रही जबकि यह धुआं बेहद अधिक जहरीला है।
पराली के निपटान का ठोस उपाय दे सरकार
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उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जानबूझकर किसान वर्ग का खून चूसा जा रहा है। इस प्रतिबंध को लागू करने से पहले सरकार धान की पराली के निपटान का ठोस उपाय या प्रबंध करे। सरकार ने धान के कचरे जलाने पर रोक लगाई है। जिस कारण किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए अतिरिक्त खर्चा करना पड़ेगा। मंदी की मार में किसान यह अतिरिक्त बोझ क्यों उठाए।
हर स्तर पर करेंगे सरकार का विरोध
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एसोसिएशन सदस्य आप सहमति से प्रस्ताव पारित किया कि अगर सरकार ने उचित प्रबंध न किए तो वह इस फरमान की परवाह नहीं करेंगे। उनपर कार्रवाई करने की धमकी देकर उन्हें डराने की कोशिश न की जाए। हम आज भी किसान के साथ हैं और कल भी। किसानों के साथ मिलकर सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध किया जाएगा ।

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